ये जीना भी कोई जीना है लल्लू,
कभी माँ का आँचल तो कभी ढूंढे गर्लफ्रेंड का पल्लु,
दौड़ती भागती जींदगी में नाचते हम जैसे लट्टू,
जब जब मीले बर्फी मांगे लड्डू ,
ये जीना भी कोई जीना है लल्लू
ये जीना भी कोई जीना है लल्लू,
कभी माँ का आँचल तो कभी ढूंढे गर्लफ्रेंड का पल्लु,
दौड़ती भागती जींदगी में नाचते हम जैसे लट्टू,
जब जब मीले बर्फी मांगे लड्डू ,
ये जीना भी कोई जीना है लल्लू
Sameer Kumar said,
April 6, 2009 at 6:31 pm
mast poem hai bhai
lage raho beta
rishijuit said,
April 6, 2009 at 6:43 pm
thanks sameer..keep on visiting 4 more…
Navdeep said,
April 9, 2009 at 9:11 pm
Keep It Up Dude