फ़ुरसत के दो पल,
दो पल के हसीन दो लवज़,
दो लवज़ मे कहि गयि दो बातें,
दो बातें ले आई दो राहेँ,
दो राहेँ पे निकल गयी शामें,
शमा जलाते निकल गयी रातें,
रात के अनधेरे मे हुइ मुलाकातें,
मुलाकात मे जब दिखी दो निगाहें,
सिमट गयी सारी राहेँ,
खो गयी सारी बातें,
ज़िंदगी के उस दो पल में,
दो पल के उस,
दो लवज़ में, दो लवज़ में, दो लवज़ में |
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Rishi said,
May 8, 2009 at 1:56 am
A poem dedicate dto TITLE of this blog…